Schreiner Franz Weber zeigt auf seine ehemalige Wohnung. Nach 45 Jahren wurde er rausgeschmissen. Und die Vermieter machen Reibach mit Euro-08-Fans.
Die Anzeige der Firma Swiss Immo Trust AG richtet sich an Euro-08-Fans. «Funktionell eingerichtete Wohnung mit acht Schlafplätzen. Ideal für Gruppen.» Adresse: Talstrasse 43 in Oberwil BL.
Hier wohnte der pensionierte Schreiner Franz Weber (69) – fast ein halbes Jahrhundert lang. «Jetzt haben sie mich rausgeschmissen», sagt er konsterniert. «Ich kann es immer noch nicht glauben. Es geht nur ums Geld, unsere Schicksale zählen nichts. Bald schlafen Euro-Hooligans in meiner Wohnung.»
28 Mietparteien erhielten an der Talstrasse 43, 45 sowie Langegasse 40 die Kündigung. Sie müssen ihr vertrautes Umfeld verlassen – die Siedlung wird totalsaniert.
Drei Monate hatte Franz Weber Zeit, um eine neue Wohnung zu suchen. Er wurde ein paar 100 Meter weiter fündig. Zu einem höheren Preis, aber immerhin in derselben Gegend. «Wir konnten uns nicht wehren. Ich fühle mich immer noch machtlos und ausgenutzt.»
Weniger Glück hatte Edeltraud Künzli (65). Die krebskranke Rentnerin konnte kaum gehen zum Zeitpunkt, als die Kündigung kam. Von Operationen geschwächt brauchte sie dreimal am Tag die Unterstützung der Spitex.
«Ich wusste zuerst nicht, wie ich das alles schaffen sollte. Ich war nahe daran aufzugeben», erzählt Edeltraud Künzli. Zum Glück hat sie noch ihre Tochter. Tatjana nahm spontan eine Woche Ferien.
Jetzt wohnt die Rentnerin wieder in Therwil, von wo sie vor 24 Jahren nach Oberwil gezogen ist. Dass jetzt Euro-08-Fans in das Haus ziehen sollen, findet die zweifache Mutter und vierfache Grossmutter schrecklich. «Ich bin so wütend. Die Besitzer sind einfach skrupellose Menschen.»
Im März hat die Swiss Immo Trust AG das Baugesuch eingereicht. Bewilligt ist es noch nicht.
Die Hausbesitzer haben die Mieter aber trotzdem schon rausbugsiert. Gerade rechtzeitig, um während der Euro 08 so richtig Kasse zu machen. Eine Altbauwohnung, die bis anhin um die 900 Franken kostete, spielt 415 Franken ein – pro Tag. Das ergibt eine stolzen Monatsmiete von 12450 Franken. Einzige Kosten: Die Vermieter schleppen acht Betten in jede Fan-Wohnung.
Die Swiss Immo Trust AG erklärt schriftlich, die Vermietung der Wohnungen an Euro-08-Fans habe nichts mit der Tatsache zu tun, dass die Wohnungen umfassend saniert werden müssen.
Ausserdem: «Der Bettpreis (inkl. Frühstück) in diesen Ferienwohnungen beträgt pro Person und Nacht 75 Franken. Bei der Festsetzung der Höhe des Preises haben wir uns an den Preisen von Jugendherbergen orientiert.»
Dass die Wohnungen als Tages-Zimmer während der Euro angeboten werden, stört auch den Mieterverband. «Es ist schlicht eine Frechheit», sagt Urs Thrier, Geschäftsführer der Sektion Baselland und Dorneck-Thierstein SO.
Hier werde nicht nur günstiger Wohnraum vernichtet. «Die Wohnungen auch noch für die Euro zu vermieten, ist ein Affront gegenüber den ehemaligen Mietern», sagt Thrier. Die Zwischennutzung sei aber legal. Man könne keine Rechtsmittel dagegen ergreifen.
Oberwil ist von Stadtzentrum Basel nur fünf Kilometer entfernt. Entsprechend gross ist die Nachfrage nach Wohnungen.
Soeben die Kündigung erhalten haben auch 60 Mietparteien der Überbauung «Im Wasen» in Oberwil. 6 Häuser werden abgerissen. Auch hier sind fast ausschliesslich Mieter mit kleinen Einkommen betroffen. Die Wohnblocks aus den 40er-Jahren werden durch Eigentumswohnungen ersetzt.
Das Geschäft mit der Euro 08 hat man «Im Wasen» allerdings verpasst: Die meisten Mieter fechten die Kündigung vor der Schlichtungsstelle Liestal an.
Wednesday, March 27, 2019
Friday, March 22, 2019
J-K: मां-बाप गुहार लगाते रहे, आतंकियों ने कर दिया 10 साल के बच्चे का कत्ल
जम्मू-कश्मीर में पिछले 24 घंटे में 4 अलग-अलग जगहों पर हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 7 आतंकियों को मार गिराया है. शुक्रवार को बांदीपोरा जिले में सुरक्षा बलों ने लश्कर के 2 आतंकियों को मार गिराया. इस बीच बांदीपोरा एनकाउंटर में 2 आतंकी भी मारे गए. बांदीपोरा के हाजीन क्षेत्र में हुए एनकाउंटर के दौरान आतंकियों ने 10 साल के एक बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया था, जिसे बाद में उन लोगों ने मार डाला.
इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें 10 साल के आतिफ मीर के परिजनों और स्थानीय लोग आतंकियों से उसे छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं. वीडियो में दिख रहा है कि लोग आतंकियों से 10 साल के बच्चे आतिफ मीर को छोड़ने को कह रहे हैं, लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं पड़ा और आतंकियों ने उस बच्चे का निर्दयता से कत्ल कर दिया. 24 घंटे तक एनकाउंटर के बाद आज सुरक्षा बलों की ओर से घटनास्थल पर की गई तलाशी के बाद 2 आतंकियों के साथ इस बच्चे का शव भी मिला.
लश्कर के दोनों आतंकी अली भाई और हुजैफ जो पिछले 5-6 सालों से घाटी में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय थे, इस एनकाउंटर में मारे गए हैं. अली भाई के बारे में कहा जा रहा है कि वह पाकिस्तान से आया था. इन आतंकियों ने इसी परिवार में शरण ले रखी थी. कल शाम को यहां पर एनकाउंटर शुरू हुआ जिसमें 2 लोग फंस गए थे, लेकिन रात में एक बुजुर्ग को वहां से निकाल लिया गया. हालांकि 10 साल का बच्चा नहीं निकल सका और आतंकियों की गिरफ्त में आ गया. इसके बाद बच्चे के दादा-दादी के अलावा माता-पिता और अन्य परिजनों की ओर से लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन आतंकियों ने बच्चे को भी मार गिराया.
एनकाउंटर के दौरान यह बच्चा आतंकियों की गिरफ्त में था और उसके परिजन उन आतंकियों से उसकी जिंदगी के लिए दुहाई मांग रहे थे. मासूम आतिफ मीर के पिता आतंकियों से यह कह रहा था, 'यह कोई जिहाद नहीं है यह जहलत है. अगर तुम मेहरबानी करके इन को छोड़ दोगे फिर तुम जिहाद करो वो दूसरी बात है. मगर इनको नबी के सदके छोड़ दो यह ठीक नहीं है. तुम हम को भी मुसीबत में डाल रहे हो और खुद को भी. मेहरबानी करके नबी के सदके इनको छोड़ दो.
वहीं उसकी मां भी आतंकियों से अपने बच्चे के लिए ऊपरवाले की दुहाई देते हुए छोड़ने की बात कह रही है. मां आतंकियों से कहती है 'मैं गुज़ारिश करती हूं कि इसको छोड़ दो. नबी के सदके खुदा का वास्ता है, मेहरबानी करो हम पर. इनको छोड़ दो. तुम खाते-पीते थे हमारे पास. मेहरबानी करके मेरे पति और बेटे को छोड़ दो. नबी के सदके इनको छोड़ दो. हम पर मेहरबानी करो. हमने इतनी क्या गलती की है.
गुजरात की फार्मा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक मामले का भगोड़ा आरोपी हितेश पटेल को अल्बानिया में हिरासत में लिया गया है. स्टर्लिंग बायोटेक मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को लंबे समय से हितेश पटेल की तलाश थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सूत्रों के मुताबिक हितेश पटेल को 11 मार्च को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. वहीं 20 मार्च को अल्बानिया में राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो तिराना द्वारा हिरासत में लिया गया.
जल्द प्रत्यर्पण की उम्मीद
स्टर्लिंग बायोटेक मामले के आरोपी हितेश पटेल की भारतीय जांच एजेंसियों को लंबे समय से तलाश थी. ईडी द्वारा विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन की शिकायत दायर की गई थी. ईडी सूत्रों के मुताबिक हितेश पटेल को जल्द ही भारत को प्रत्यर्पित किए जाने की उम्मीद है. बता दें कि हितेश पटेल पर 8100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.
क्या है स्टर्लिंग बायोटेक मामला
दरअसल, 8,100 करोड़ रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में आपराधिक जांच से बचने के लिए स्टर्लिंग ग्रुप के सभी चार प्रमोटर देश से फरार हो गए थे. इन आरोपियों में हितेश पटेल के अलावा नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा, दीप्ति संदेसरा, राजभूषण दीक्षित, चार्टर्ड अकाउंटेंट हेमंत हाथी और बिचौलिया गगन धवन शामिल हैं. स्टर्लिंग ग्रुप की कंपनियों में स्टर्लिंग बॉयोटेक लिमिटेड, पीएमटी मशींस लिमिटेड, स्टर्लिंग सेज ऐंड इंफ्रा लिमिटेड, स्टर्लिंग पोर्ट लिमिटेड, स्टर्लिंग ऑयल रिसोर्स लिमिटेड और 170 से ज्यादा शेल कंपनियां शामिल हैं.
इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें 10 साल के आतिफ मीर के परिजनों और स्थानीय लोग आतंकियों से उसे छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं. वीडियो में दिख रहा है कि लोग आतंकियों से 10 साल के बच्चे आतिफ मीर को छोड़ने को कह रहे हैं, लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं पड़ा और आतंकियों ने उस बच्चे का निर्दयता से कत्ल कर दिया. 24 घंटे तक एनकाउंटर के बाद आज सुरक्षा बलों की ओर से घटनास्थल पर की गई तलाशी के बाद 2 आतंकियों के साथ इस बच्चे का शव भी मिला.
लश्कर के दोनों आतंकी अली भाई और हुजैफ जो पिछले 5-6 सालों से घाटी में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय थे, इस एनकाउंटर में मारे गए हैं. अली भाई के बारे में कहा जा रहा है कि वह पाकिस्तान से आया था. इन आतंकियों ने इसी परिवार में शरण ले रखी थी. कल शाम को यहां पर एनकाउंटर शुरू हुआ जिसमें 2 लोग फंस गए थे, लेकिन रात में एक बुजुर्ग को वहां से निकाल लिया गया. हालांकि 10 साल का बच्चा नहीं निकल सका और आतंकियों की गिरफ्त में आ गया. इसके बाद बच्चे के दादा-दादी के अलावा माता-पिता और अन्य परिजनों की ओर से लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन आतंकियों ने बच्चे को भी मार गिराया.
एनकाउंटर के दौरान यह बच्चा आतंकियों की गिरफ्त में था और उसके परिजन उन आतंकियों से उसकी जिंदगी के लिए दुहाई मांग रहे थे. मासूम आतिफ मीर के पिता आतंकियों से यह कह रहा था, 'यह कोई जिहाद नहीं है यह जहलत है. अगर तुम मेहरबानी करके इन को छोड़ दोगे फिर तुम जिहाद करो वो दूसरी बात है. मगर इनको नबी के सदके छोड़ दो यह ठीक नहीं है. तुम हम को भी मुसीबत में डाल रहे हो और खुद को भी. मेहरबानी करके नबी के सदके इनको छोड़ दो.
वहीं उसकी मां भी आतंकियों से अपने बच्चे के लिए ऊपरवाले की दुहाई देते हुए छोड़ने की बात कह रही है. मां आतंकियों से कहती है 'मैं गुज़ारिश करती हूं कि इसको छोड़ दो. नबी के सदके खुदा का वास्ता है, मेहरबानी करो हम पर. इनको छोड़ दो. तुम खाते-पीते थे हमारे पास. मेहरबानी करके मेरे पति और बेटे को छोड़ दो. नबी के सदके इनको छोड़ दो. हम पर मेहरबानी करो. हमने इतनी क्या गलती की है.
गुजरात की फार्मा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक मामले का भगोड़ा आरोपी हितेश पटेल को अल्बानिया में हिरासत में लिया गया है. स्टर्लिंग बायोटेक मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को लंबे समय से हितेश पटेल की तलाश थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सूत्रों के मुताबिक हितेश पटेल को 11 मार्च को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. वहीं 20 मार्च को अल्बानिया में राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो तिराना द्वारा हिरासत में लिया गया.
जल्द प्रत्यर्पण की उम्मीद
स्टर्लिंग बायोटेक मामले के आरोपी हितेश पटेल की भारतीय जांच एजेंसियों को लंबे समय से तलाश थी. ईडी द्वारा विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन की शिकायत दायर की गई थी. ईडी सूत्रों के मुताबिक हितेश पटेल को जल्द ही भारत को प्रत्यर्पित किए जाने की उम्मीद है. बता दें कि हितेश पटेल पर 8100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.
क्या है स्टर्लिंग बायोटेक मामला
दरअसल, 8,100 करोड़ रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में आपराधिक जांच से बचने के लिए स्टर्लिंग ग्रुप के सभी चार प्रमोटर देश से फरार हो गए थे. इन आरोपियों में हितेश पटेल के अलावा नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा, दीप्ति संदेसरा, राजभूषण दीक्षित, चार्टर्ड अकाउंटेंट हेमंत हाथी और बिचौलिया गगन धवन शामिल हैं. स्टर्लिंग ग्रुप की कंपनियों में स्टर्लिंग बॉयोटेक लिमिटेड, पीएमटी मशींस लिमिटेड, स्टर्लिंग सेज ऐंड इंफ्रा लिमिटेड, स्टर्लिंग पोर्ट लिमिटेड, स्टर्लिंग ऑयल रिसोर्स लिमिटेड और 170 से ज्यादा शेल कंपनियां शामिल हैं.
Thursday, March 14, 2019
aajtak.in का ई-चुनाव 2019, सीट चुनिए और वोट कीजिए
लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी आम चुनाव 2019 की घोषणा हो चुकी है. चुनाव आयोग ने देशभर में सात चरणों में चुनाव का ऐलान कर नई सरकार के चयन की प्रक्रिया आरंभ कर दी है. 11 अप्रैल से लोकसभा की कुल 543 में से 91 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, ये चुनाव का पहला चरण होगा. अंतिम चरण में वोटिंग 19 मई को होगी जिसके बाद पूरे देश के चुनाव नतीजों का ऐलान 23 मई को किया जाएगा.
अगर आप भी इन चुनावों में वोटर हैं और अपनी लोकसभा सीट पर मतदान की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं तो aajtak.in आपके लिए लेकर आया है मौका जहां आप किसी भी लोकसभा सीट पर अपनी मनपसंद राजनीतिक पार्टी के लिए वोट कर सकते हैं. जी हां, aajtak.in के ई-चुनाव 2019 के जरिए आप अपनी मनचाही सीट पर मनचाही पार्टी के लिए वोटिंग की सुविधा पा सकते हैं. इस वोटिंग के लिए न तो आपको किसी वोटर आईडी की जरूरत होगी और न ही किसी पोलिंग बूथ तक जाना होगा. आपके द्वारा दिए गए वोट के जरिए जाना जाएगा अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग पार्टियों को लेकर जनता का मिजाज.
कैसे करें वोटिंग
ई-चुनाव 2019 के जरिए वोट करने की प्रक्रिया बेहद आसान है. वोट करने के लिए यहां क्लिक करें. सबसे पहले अपना प्रदेश चुनिए. प्रदेश चुनते ही उस प्रदेश की सभी लोकसभा सीटें नीचे आ जाएंगी. वहां से अपनी लोकसभा सीट चुनिए और नीचे कंटीन्यू पर क्लिक कीजिए. कंटीन्यू पर क्लिक करते ही एक नई विंडो खुलेगी.
नई विंडो पर आपके द्वारा चुनी गई सीट पर चुनाव मैदान में मौजूद सभी पार्टियां और उनका चुनाव चिह्न नजर आएंगे. आप उस सीट पर अपनी पसंदीदा पार्टी को वोट देने के लिए वोट नाउ पर क्लिक कर सकते हैं. वोट नाउ पर क्लिक करते ही एक और विंडो खुलेगी जहां आपको अपना मोबाइल नंबर डालना होगा. इससे आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा जिसे दर्ज कर वेरिफाई करते ही वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. आपने जिस पार्टी को वोट दिया है उसकी तस्दीक भी की जाएगी.
एक फोन नंबर से एक ही वोट दिया जा सकेगा. यदि आप किसी एक सीट पर किसी पार्टी को वोट दे चुके हैं और उसकी पुष्टि हो चुकी है तो आप फिर अपना फैसला बदल नहीं सकेंगे. कहने का अर्थ है कि फिर उस सीट पर किसी दूसरी पार्टी को नहीं चुन सकते. तो जब तक आपके क्षेत्र में वोटिंग की तारीख नहीं आ जाती और आप पोलिंग बूथ पर जाकर वोट नहीं डाल देते तब तक आप आजतक के ई चुनाव में भाग लेकर अपनी पसंदीदा पार्टी के लिए वोट कर सकते हैं.
अगर आप भी इन चुनावों में वोटर हैं और अपनी लोकसभा सीट पर मतदान की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं तो aajtak.in आपके लिए लेकर आया है मौका जहां आप किसी भी लोकसभा सीट पर अपनी मनपसंद राजनीतिक पार्टी के लिए वोट कर सकते हैं. जी हां, aajtak.in के ई-चुनाव 2019 के जरिए आप अपनी मनचाही सीट पर मनचाही पार्टी के लिए वोटिंग की सुविधा पा सकते हैं. इस वोटिंग के लिए न तो आपको किसी वोटर आईडी की जरूरत होगी और न ही किसी पोलिंग बूथ तक जाना होगा. आपके द्वारा दिए गए वोट के जरिए जाना जाएगा अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग पार्टियों को लेकर जनता का मिजाज.
कैसे करें वोटिंग
ई-चुनाव 2019 के जरिए वोट करने की प्रक्रिया बेहद आसान है. वोट करने के लिए यहां क्लिक करें. सबसे पहले अपना प्रदेश चुनिए. प्रदेश चुनते ही उस प्रदेश की सभी लोकसभा सीटें नीचे आ जाएंगी. वहां से अपनी लोकसभा सीट चुनिए और नीचे कंटीन्यू पर क्लिक कीजिए. कंटीन्यू पर क्लिक करते ही एक नई विंडो खुलेगी.
नई विंडो पर आपके द्वारा चुनी गई सीट पर चुनाव मैदान में मौजूद सभी पार्टियां और उनका चुनाव चिह्न नजर आएंगे. आप उस सीट पर अपनी पसंदीदा पार्टी को वोट देने के लिए वोट नाउ पर क्लिक कर सकते हैं. वोट नाउ पर क्लिक करते ही एक और विंडो खुलेगी जहां आपको अपना मोबाइल नंबर डालना होगा. इससे आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा जिसे दर्ज कर वेरिफाई करते ही वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. आपने जिस पार्टी को वोट दिया है उसकी तस्दीक भी की जाएगी.
एक फोन नंबर से एक ही वोट दिया जा सकेगा. यदि आप किसी एक सीट पर किसी पार्टी को वोट दे चुके हैं और उसकी पुष्टि हो चुकी है तो आप फिर अपना फैसला बदल नहीं सकेंगे. कहने का अर्थ है कि फिर उस सीट पर किसी दूसरी पार्टी को नहीं चुन सकते. तो जब तक आपके क्षेत्र में वोटिंग की तारीख नहीं आ जाती और आप पोलिंग बूथ पर जाकर वोट नहीं डाल देते तब तक आप आजतक के ई चुनाव में भाग लेकर अपनी पसंदीदा पार्टी के लिए वोट कर सकते हैं.
Friday, March 1, 2019
#Balakot: क्या ये पाकिस्तान में भारत के हवाई हमले की असली तस्वीरें हैं?: फ़ैक्ट चेक
सोशल मीडिया में कई तस्वीरें इस दावे के साथ वायरल की जा रही हैं कि ये तस्वीरें पाकिस्तान के उस जगह की हैं जहां भारतीय विमानों ने मंगलवार को बम गिराए थे.
भारत का कहना है कि उसने पाकिस्तान के बालाकोट में चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण ठिकानों को निशाना बनाया और चरमपंथी समूह के कुछ सदस्यों को मार डाला.
भारत का दावा है कि ये स्ट्राइक पहले से नियोजित थी और बचाव के लिए की गई थी क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद भारत के कई हिस्सों में फ़िदायीन हमले की योजना बना रहा था.
इससे पहले जैश ने 14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षाबलों के काफ़िले पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. इस आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ़ के 40 से ज़्यादा जवान मारे गए थे.
भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की बात तो क़बूली लेकिन इस ऑपरेशन की कोई तस्वीर जारी नहीं की. हालांकि पाकिस्तान ने कुछ तस्वीरें ज़रूर जारी कीं, साथ ही ये दावा किया कि इस हमले में उन्हें कोई नुक़सान नहीं हुआ.
इन अलग-अलग और विरोधाभासी दावों के बीत भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फ़ेसबुक और ट्विटर पर तरह-तरह की तस्वीरें वायरल की जा रही हैं. इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है जैसे भारतीय एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान में भारी नुकसान हुई है.
सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें हज़ारों-लाखों बार शेयर की गई हैं लेकिन बीबीसी फ़ैक्ट चेक टीम ने पाया है कि ये तस्वीरें फ़ेक हैं.
तस्वीर-1
ये तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है भारतीय हवाई हमले ने पाकिस्तान के बालाकोट में भारी तबाही मचाई है.
इस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है कि वहां के घर और इमारतें पूरी तरह नष्ट होकर धराशायी हो गई हैं.
लेकिन सच्चाई ये है कि इस तस्वीर का भारत-पाकिस्तान के हालिया तनाव से कोई लेना-देना नहीं है. ये एक पुरानी तस्वीर है जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में साल 2005 में आए भूकंप के बाद की तबाही दर्शाती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस भूकंप में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में लगभग 75,000 लोग मारे गए थे.
ये ख़बर पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने यह तस्वीर 10 अक्टूबर 2005 को प्रकाशित की थी.
एएफ़पी की तस्वीर देखने के लिए यहां क्लिक करें.
तस्वीर-2
ऐसी ही एक दूसरी तस्वीर कई वॉट्सऐप ग्रुप्स में और दक्षिण पंथी फ़ेसबुक पेजों जैसे "आई सपोर्ट अमित शाह" पर शेयर की जा रही है. इस तस्वीर में भी भारी तबाही दिखाई गई है लेकिन सच्चाई ये है कि ये तस्वीर भी उसी भूकंप की है.
ये तस्वीर फ़ोटो पत्रकार पॉला ब्रॉन्सटाइन ने खींची थी और अब भी ये गेटी इमेजेज़ पर उपलब्ध है.
असली तस्वीर देखने के लिए यहां क्लिक करिए.
तस्वीर-3
एक और वायरल तस्वीर इंटरनेट पर हर जगह है और वो भी बालाकोट में 2005 में आए भूकंप की ही है.
ये तस्वीर समाचार एजेंसी एएफ़पी के फोटोग्राफ़र फारूख़ नईम ने खींची थी.
नईम की खींची असली तस्वीर देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
तस्वीर-4
ऐसी ही एक और तस्वीर है जो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर की जा रही है. दावा किया जा रहा है कि ये पाकिस्तान के उन लोगों के जनाजे़ की तस्वीरें हैं जो भारत के हवाई हमले में मारे गए थे.
हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये वो तस्वीर है जब साल 2014 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर झंडा झुकाने के कार्यक्रम के दौरान 57 लोग उस वक़्त मर गए थे जब एक आत्मघाती हमलावर ने लोगों के पास आने की कोशिश की.
रॉयटर्स की रिपोर्ट पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
ये तस्वीर भी अभी गेटी पर मौजूद है और इसे राना साजिद हुसैन ने खींचा थी.
साजिद हुसैन की खींची ये तस्वीर देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
हमें कुछ और भी तस्वीरें मिली हैं जो असल में पिछले चरमपंथी हमलों और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी हैं लेकिन उन्हें भारतीय एयरस्ट्राइक की तस्वीरें बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.
हम उन तस्वीरों को यहां प्रकाशित नहीं कर रहे हैं क्योंकि वो बहुत ज़्यादा विचलित करने वाली हैं.
भारत का कहना है कि उसने पाकिस्तान के बालाकोट में चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण ठिकानों को निशाना बनाया और चरमपंथी समूह के कुछ सदस्यों को मार डाला.
भारत का दावा है कि ये स्ट्राइक पहले से नियोजित थी और बचाव के लिए की गई थी क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद भारत के कई हिस्सों में फ़िदायीन हमले की योजना बना रहा था.
इससे पहले जैश ने 14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षाबलों के काफ़िले पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. इस आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ़ के 40 से ज़्यादा जवान मारे गए थे.
भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की बात तो क़बूली लेकिन इस ऑपरेशन की कोई तस्वीर जारी नहीं की. हालांकि पाकिस्तान ने कुछ तस्वीरें ज़रूर जारी कीं, साथ ही ये दावा किया कि इस हमले में उन्हें कोई नुक़सान नहीं हुआ.
इन अलग-अलग और विरोधाभासी दावों के बीत भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फ़ेसबुक और ट्विटर पर तरह-तरह की तस्वीरें वायरल की जा रही हैं. इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है जैसे भारतीय एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान में भारी नुकसान हुई है.
सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें हज़ारों-लाखों बार शेयर की गई हैं लेकिन बीबीसी फ़ैक्ट चेक टीम ने पाया है कि ये तस्वीरें फ़ेक हैं.
तस्वीर-1
ये तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है भारतीय हवाई हमले ने पाकिस्तान के बालाकोट में भारी तबाही मचाई है.
इस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है कि वहां के घर और इमारतें पूरी तरह नष्ट होकर धराशायी हो गई हैं.
लेकिन सच्चाई ये है कि इस तस्वीर का भारत-पाकिस्तान के हालिया तनाव से कोई लेना-देना नहीं है. ये एक पुरानी तस्वीर है जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में साल 2005 में आए भूकंप के बाद की तबाही दर्शाती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस भूकंप में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में लगभग 75,000 लोग मारे गए थे.
ये ख़बर पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने यह तस्वीर 10 अक्टूबर 2005 को प्रकाशित की थी.
एएफ़पी की तस्वीर देखने के लिए यहां क्लिक करें.
तस्वीर-2
ऐसी ही एक दूसरी तस्वीर कई वॉट्सऐप ग्रुप्स में और दक्षिण पंथी फ़ेसबुक पेजों जैसे "आई सपोर्ट अमित शाह" पर शेयर की जा रही है. इस तस्वीर में भी भारी तबाही दिखाई गई है लेकिन सच्चाई ये है कि ये तस्वीर भी उसी भूकंप की है.
ये तस्वीर फ़ोटो पत्रकार पॉला ब्रॉन्सटाइन ने खींची थी और अब भी ये गेटी इमेजेज़ पर उपलब्ध है.
असली तस्वीर देखने के लिए यहां क्लिक करिए.
तस्वीर-3
एक और वायरल तस्वीर इंटरनेट पर हर जगह है और वो भी बालाकोट में 2005 में आए भूकंप की ही है.
ये तस्वीर समाचार एजेंसी एएफ़पी के फोटोग्राफ़र फारूख़ नईम ने खींची थी.
नईम की खींची असली तस्वीर देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
तस्वीर-4
ऐसी ही एक और तस्वीर है जो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर की जा रही है. दावा किया जा रहा है कि ये पाकिस्तान के उन लोगों के जनाजे़ की तस्वीरें हैं जो भारत के हवाई हमले में मारे गए थे.
हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये वो तस्वीर है जब साल 2014 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर झंडा झुकाने के कार्यक्रम के दौरान 57 लोग उस वक़्त मर गए थे जब एक आत्मघाती हमलावर ने लोगों के पास आने की कोशिश की.
रॉयटर्स की रिपोर्ट पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
ये तस्वीर भी अभी गेटी पर मौजूद है और इसे राना साजिद हुसैन ने खींचा थी.
साजिद हुसैन की खींची ये तस्वीर देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
हमें कुछ और भी तस्वीरें मिली हैं जो असल में पिछले चरमपंथी हमलों और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी हैं लेकिन उन्हें भारतीय एयरस्ट्राइक की तस्वीरें बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.
हम उन तस्वीरों को यहां प्रकाशित नहीं कर रहे हैं क्योंकि वो बहुत ज़्यादा विचलित करने वाली हैं.
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